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POS में एंट्री के बिना खाद वितरण का आरोप, करीब 2 लाख रुपये के वाउचर भी लंबित; प्रभारी प्रबंधक को पद और वित्तीय प्रभार से हटाने के बाद भी कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

 



एरमसाही सहकारी समिति में 280 बोरी खाद के वितरण पर बड़ा सवाल

बिलासपुर/मस्तूरी/एरमसाही। मस्तूरी विकासखंड की सेवा सहकारी समिति एरमसाही (पंजीयन क्रमांक 687) में खाद के स्टॉक और वितरण को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। किसानों को खाद नहीं मिलने की शिकायत के बाद कृषि एवं सहकारिता विभाग द्वारा कराई गई जांच में खाद के भंडारण, POS मशीन में इंद्राज और वितरण प्रक्रिया को लेकर कई सवाल दर्ज किए गए हैं।


जांच में 280 बोरी खाद का उल्लेख


उप संचालक कृषि बिलासपुर के 16 जुलाई 2026 के पत्र तथा सहकारिता विस्तार अधिकारी मस्तूरी के 27 जुलाई 2026 के जांच प्रतिवेदन के आधार पर मामले की जांच की गई।


जांच में समिति के गोदाम में एनपीके 20:20:10 की 14 मीट्रिक टन तथा एसएसपी पाउडर की 1.30 मीट्रिक टन, यानी कुल 15.30 मीट्रिक टन खाद का भंडारण दर्ज किया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार यह खाद श्री राम एग्रोटेक, झाबुआ (मध्यप्रदेश) से लाई गई थी।


POS मशीन में इंद्राज किए बिना वितरण का आरोप


जांच रिपोर्ट में खाद के वितरण को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार खाद का वितरण POS मशीन में इंद्राज किए बिना परमिट के आधार पर किया गया। वहीं समिति प्रबंधन द्वारा खाद से संबंधित बिल एवं वाउचर उपलब्ध नहीं कराए जाने का भी उल्लेख जांच में किया गया है।


यदि जांच में दर्ज ये तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह सवाल उठता है कि समिति में प्राप्त खाद का वास्तविक स्टॉक, वितरण और बिक्री का हिसाब किस आधार पर दर्ज किया गया।


करीब 2 लाख रुपये के वाउचर भी लंबित


मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि जांच रिपोर्ट में लगभग 2 लाख रुपये की खाद से संबंधित परमिट वाउचर प्रभारी प्रबंधक बबलू धृतलहरे के पास शेष होने का उल्लेख किया गया है।


ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि संबंधित खाद किन किसानों को वितरित की गई, उसका भुगतान किस माध्यम से हुआ और POS रिकॉर्ड में उसका विवरण क्यों नहीं दिखाई देता? इन सवालों का स्पष्ट जवाब जांच और संबंधित विभागीय रिकॉर्ड से ही सामने आ सकता है।


उप आयुक्त सहकारिता ने कार्रवाई के दिए निर्देश


मामले को गंभीर मानते हुए कार्यालय उप आयुक्त सहकारिता एवं उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं, बिलासपुर द्वारा पत्र क्रमांक 1132, दिनांक 25 अगस्त 2026 जारी किया गया।


उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार संबंधित प्रभारी प्रबंधक के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सहकारी सोसायटी सेवा नियमों के तहत लघु/दीर्घ शास्ति की कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए गए।


8 सितंबर को पद और वित्तीय प्रभार से हटाया गया


इसके बाद प्राधिकृत अधिकारी, सेवा सहकारी समिति एरमसाही द्वारा 8 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर प्रभारी संस्था प्रबंधक बबलू धृतलहरे को तत्काल प्रभाव से प्रभारी प्रबंधक के पद एवं वित्तीय प्रभार से मुक्त किया गया।


लेकिन यहीं से मामला और बड़ा सवाल खड़ा करता है।


आदेश के बाद भी क्या हो रही है पूरी कार्रवाई?


ग्रामीणों का आरोप है कि केवल पद और वित्तीय प्रभार से हटाने की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि खाद वितरण में हुई कथित अनियमितता की जिम्मेदारी तय करने, वाउचर एवं POS रिकॉर्ड का मिलान कराने तथा खाद के वास्तविक लाभार्थियों की जांच किए बिना मामला अधूरा रहेगा।


ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि संबंधित व्यक्ति को प्रबंधकीय एवं वित्तीय जिम्मेदारी से हटाने का आदेश जारी हो चुका है, तो क्या वह अभी भी समिति के कामकाज से किसी रूप में जुड़ा हुआ है? यदि ऐसा है तो किस आदेश या अधिकार के तहत?


280 बोरी खाद का हिसाब आखिर कहां है?


पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि समिति में दर्ज 280 बोरी खाद का पूरा हिसाब-किताब क्या है?


- खाद समिति में कब पहुंची?

- कितनी खाद किस किसान को वितरित की गई?

- कितनी खाद का POS में इंद्राज हुआ?

- बिना POS एंट्री के वितरण किसके आदेश पर हुआ?

- लगभग 2 लाख रुपये के वाउचर अब तक लंबित क्यों हैं?

- खाद का भुगतान किससे और किस माध्यम से लिया गया?

- क्या सभी लाभार्थी किसानों के बयान लिए गए?

- क्या POS रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर, परमिट और बैंक/कैश रिकॉर्ड का मिलान कराया गया?

- और यदि अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध आगे क्या कार्रवाई होगी?

जवाबदेही तय होने का इंतजार

यह मामला केवल एक सहकारी समिति के खाद वितरण तक सीमित नहीं है। खाद की उपलब्धता किसानों के लिए सीधे तौर पर महत्वपूर्ण है। ऐसे में यदि सरकारी व्यवस्था के माध्यम से वितरित की जाने वाली खाद के रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आती है तो पूरे मामले की निष्पक्ष विभागीय जांच और रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन जरूरी हो जाता है।

 ग्रामीण एवं किसानों को संबंधित विभाग से यह जानना चाहता है कि 8 सितंबर को पद एवं वित्तीय प्रभार से मुक्त किए जाने के बाद मामले में अब तक क्या अंतिम कार्रवाई की गई है और 280 बोरी खाद के वितरण का पूरा हिसाब कहां है?


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