10 साल से जर्जर 25 किलोमीटर जलसों-भरारी मार्ग, आखिर कब जागेगा प्रशासन?
शहीद चंद्रशेखर कुर्रे और शहीद शिवकुमार मरकाम के ग्राम जलसों से होकर गुजरता है यह मार्ग, पचपेड़ी मुख्य मार्ग से बिलासपुर को सीधे जांजगीर-चांपा जिले से जोड़ता है—ग्रामीणों का आरोप, राज्य सरकार की मूलभूत योजनाओं से क्षेत्र को मूलतः दूर रखा गया
पचपेड़ी/मस्तूरी, जिला बिलासपुर (छत्तीसगढ़)।
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं नवभारत संवाददाता, तहसील पचपेड़ी परिक्षेत्र श्री मुकेश कुमार कांत के द्वारा बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन के अधिकारी, कलेक्टर महोदय एवं पीडब्ल्यूडी विभाग के प्रभारी अधिकारियों को बार-बार वर्षों से लिखित शिकायत तथा सुशासन तिहार के माध्यम से मांग की जा रही है कि इस जर्जर सड़क मार्ग पर तत्काल मरम्मत कार्य कराया जाए। इसके बावजूद अब तक सड़क की स्थिति में कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
पचपेड़ी थाना मुख्य मार्ग से होकर गुजरने वाला जलसों-भरारी मार्ग लगभग 25 किलोमीटर लंबा महत्वपूर्ण मार्ग है, जो बिलासपुर जिले को सीधे जांजगीर-चांपा जिले से जोड़ता है। यह मार्ग शहीद चंद्रशेखर कुर्रे एवं शहीद शिवकुमार मरकाम के ग्राम जलसों से होकर गुजरता है। इसके बावजूद यह महत्वपूर्ण मार्ग पिछले करीब 10 वर्षों से जर्जर और बदहाल स्थिति में पड़ा हुआ है।
यह मार्ग मुख्य जिला मार्ग (MDR) होने के कारण क्षेत्र के अनेक गांवों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन है। प्रतिदिन ग्रामीण, छात्र-छात्राएं, बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं, गर्भवती महिलाएं, मरीज, नौकरीपेशा लोग और व्यापारी इसी मार्ग से आवागमन करते हैं। सड़क की खराब स्थिति के कारण सभी वर्गों को वर्षों से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
गड्ढों में तब्दील सड़क, आवागमन बना जोखिम
सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और क्षतिग्रस्त हिस्से होने के कारण वाहन चालकों को काफी परेशानी होती है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग विशेष रूप से जोखिम भरा बना हुआ है। बारिश के दौरान सड़क की स्थिति और खराब हो जाने से दुर्घटना की आशंका भी बढ़ जाती है।
सबसे बड़ी परेशानी तब होती है जब किसी मरीज या गर्भवती महिला को उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ता है। खराब सड़क के कारण सफर में समय अधिक लगता है और वाहन चालकों को भी काफी सावधानी बरतनी पड़ती है।
व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित
सड़क की बदहाली का असर सिर्फ आवागमन तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र के व्यापारियों और छोटे व्यवसायियों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। खराब सड़क के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों पर भी असर पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब यह मार्ग बिलासपुर को सीधे जांजगीर-चांपा जिले से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, तो फिर वर्षों से इसकी स्थायी मरम्मत क्यों नहीं की जा रही है?
मरम्मत के नाम पर खर्च हुई राशि पर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों द्वारा सड़क की मरम्मत को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि समय-समय पर सड़क की मरम्मत के नाम पर सरकारी राशि खर्च किए जाने के बावजूद सड़क की स्थिति में स्थायी सुधार नहीं हुआ।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सड़क मरम्मत के नाम पर किए गए कार्यों की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई?
क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया?
अगर मरम्मत कार्य कराया गया था, तो कुछ समय बाद सड़क दोबारा जर्जर कैसे हो गई?
और यदि कार्य नहीं हुआ, तो मरम्मत के नाम पर स्वीकृत और खर्च की गई राशि का उपयोग कहां हुआ?
इन सवालों का जवाब ग्रामीण अब संबंधित विभाग और प्रशासन से मांग रहे हैं।
वर्षों से शिकायत, फिर भी समाधान नहीं
मुकेश कुमार कांत के अनुसार, सड़क की समस्या को लेकर जिला प्रशासन, कलेक्टर एवं लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायत दी गई है। इसके अलावा सुशासन तिहार के माध्यम से भी सड़क मरम्मत की मांग रखी गई है।
इसके बावजूद वर्षों से समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन से सड़क की समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि मौके पर वास्तविक काम दिखाई देना चाहिए।
शहीदों के गांव से गुजरता है मार्ग, फिर भी मूलभूत सुविधा का अभाव
ग्राम जलसों को शहीद चंद्रशेखर कुर्रे और शहीद शिवकुमार मरकाम की धरती बताया जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि शहीदों के गांव से होकर गुजरने वाला महत्वपूर्ण मार्ग आज भी बदहाल है।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा क्षेत्र राज्य सरकार की मूलभूत योजनाओं से मूलतः दूर रखा गया है, जिसके कारण सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी आवश्यक सुविधाओं को लेकर लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अब प्रशासन से ग्रामीणों के सीधे सवाल
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन और लोक निर्माण विभाग इस 25 किलोमीटर मार्ग का तत्काल स्थल निरीक्षण कराए और सड़क की वास्तविक स्थिति का आकलन करे।
साथ ही ग्रामीण यह भी चाहते हैं कि पिछले वर्षों में इस मार्ग के लिए स्वीकृत राशि, मरम्मत कार्य, कार्य एजेंसी, ठेकेदार, भुगतान और गुणवत्ता जांच से संबंधित पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।
सवाल यह है कि आखिर 10 वर्षों से सड़क की बदहाली का जिम्मेदार कौन है?
क्या अब इस मार्ग का स्थायी समाधान होगा?
क्या मरम्मत के नाम पर हुए कार्यों और खर्च की निष्पक्ष जांच होगी?
और क्या शहीदों के गांव से गुजरने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग को आखिरकार सरकार की मूलभूत योजनाओं का लाभ मिलेगा?
ग्रामीण अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी सड़क निर्माण और जवाबदेही तय किए जाने की मांग कर रहे हैं।
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