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सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक छात्र-छात्राएं धरने पर बैठे, प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप

 



नवोदय विद्यालय मल्हार में छात्र की मौत के विरोध में उबाल

सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक छात्र-छात्राएं धरने पर बैठे, प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप


मस्तूरी    मल्हार। नवोदय विद्यालय मल्हार में कक्षा 10वीं के छात्र हर्षित यादव की मौत के बाद सोमवार से उबाल तेज हो गया है। घटना के विरोध में मंगलवार सुबह 8 बजे से छात्र-छात्राएं विद्यालय गेट के बाहर धरने पर बैठ गए। दोपहर 2 बजे तक कई घंटे बीत जाने के बाद भी छात्र-छात्राएं डटे रहे, बाद में समझाइश के बाद वे खाना खाने के लिए लौटे।


विद्यालय में कुल 548 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं, जिनमें 234 लड़कियाँ और 314 लड़के + 2 बाहरी विद्यार्थी शामिल हैं। इनके लिए रेगुलर और प्राइवेट मिलाकर कुल 26 शिक्षक नियुक्त हैं।


छात्र की मौत और गंभीर आरोप


बेलगहना निवासी हर्षित यादव (कक्षा 10वीं) की 24 नवंबर को तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई थी। परिजनों और छात्रों के अनुसार हर्षित को हॉस्टल में निमोनिया हो गया था, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने समय पर इलाज नहीं कराया। आरोप है कि छात्र की हालत गंभीर होने पर भी परिजनों को ले जाने के लिए वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे पिता को उसे बाइक पर ही अस्पताल ले जाना पड़ा।

हर्षित की मौत के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कर बिसरा प्रिजर्व किया, जिसे एफएसएल जांच के लिए भेजा जाएगा। मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है।


छात्र बोले— हॉस्टल, सफाई और खाने की व्यवस्था खराब


धरना दे रहे छात्रों ने प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए—


हॉस्टल में साफ-सफाई नहीं होती


समय पर दवा और इलाज नहीं दिया जाता


भोजन की गुणवत्ता खराब


शिकायतों को नजरअंदाज किया जाता है



स्थानीय नेताओं का समर्थन, प्रबंधन पर तंज


धरने की जानकारी मिलते ही मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने नवोदय प्रबंधन और केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि “बच्चों की मांगों को तुरंत पूरा किया जाए।”


जिला पंचायत सदस्य सतकली बावरे ने भी छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि “बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य प्राथमिकता होनी चाहिए, प्रबंधन को जवाब देना होगा।”


प्रशासन और अधिकारियों का इंतजार


मामले को लेकर एसडीएम प्रवेश पैकरा, अतिरिक्त तहसीलदार रोशन साहू, नगर पंचायत एसडीओ, शिक्षा अधिकारी सहित कई अधिकारी छात्रों को समझा रहे हैं।

वहीं छात्र डीसी/कलेक्टर से सीधी वार्ता करने की मांग पर अड़े हैं।

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