पचपेड़ी –ग्रामपंचायत गोडाडीह में खुले जिंदल माइंस में रोजगार मांगने ग्रामीण युवा बेरोजगार जाते है मगर काम नहीं है बोल कर जिंदल कंपनी बेरोजगारों को भगा देते है,रोजगार के मांग को लेकर पिछले वर्ष 90 दिनों तक ग्रामीणों द्वारा धरना प्रदर्शन भी किया था ,कई नेता मंत्रियों व् अधिकारियों से शिकायत भी किए थे मगर नेताओं अधिकारियों के चक्कर काट काट कर बेरोजगारों के चप्पल घिस गए मगर युवा बेरोजगारों का तकलीफ कोई नहीं सुना बादमें थक हार कर युवाओं ने धरना प्रदर्शन बंद कर दिया दिनांक 05/11/25 को बेरोजगारों ने जिंदल माइंस के खिलाफ फिरसे बिगुल फुक दिया है जिसमें बेरोजगारों ने जिंदल माइंस को बंद कराकर रोजगार की मांग रखी है, युवाओं का कहना है कि जप तक हमे हमारा हक नहीं मिल जाता तबतक जिंदल माइंस को चालू होने नहीं देगे।क्यों कि हम नेताओं अधिकारियों के ऑफिस के चक्कर लगाते लगाते थक चुके है,अगर इस बार साधन प्रशासन हमारे बीच में आई तो रोड में उतर कर जनांदोलन और जरूरत होने पर आत्मदाह भी करेंगे जो नेता चुनाव के समय हरा पैर पकड़ कर वोट मांगती है ओभी आज हमारी बात सुनने के लिए तैयार नहीं है,
जिंदल माइंस में अन्य प्रदेश के लोगों को लाकर काम कराया जा रहा है,वही माइंस के कारण होने वाले प्रदूषण को ग्रामीण झेल रहे है,माइंस के कारण जल स्तर कम हो गया है,गर्मियों के मौसम में हैंड पम्प से पानी निकलना बंद हो जाता है जिसके यह कई सौ फूट तक बोर हुआ है उनके यहा से पानी लाकर गुजारा कर रहे है,कुछ दिन के लिए लाइट बंद हो गया तो 2 किलो मीटर तक पैदल जाकर पानी भर कर लाना पड़ता है,इसके बावजूद भी जिंदल माइंस के पास अपने ही गांव में खुले कंपनी में काम नहीं दे रहे है,सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गोडाडीह में कुछ दलाल सक्रिय है,जिसमें बाहरी लोगों से मोटेमोट रकम लेकर जिंदल माइंस में काम दिलाया जाता है,जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है,
अब देखना यह है कि जिंदल माइंस बेरोजगारों को काम में रखती है या तुम लोगों के पास स्किल नहीं बोलकर हमेशा की तरह गोल गोल घुमाने का काम करती है।


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