ग्रामीण बोले—सरकारी अस्पताल सिर्फ नाम का, डॉक्टर और स्टाफ कभी-कभार ही दिखते हैं
बिलासपुर।
पचपेड़ी क्षेत्र के अंतिम छोर ग्राम पंचायत कुकुरदी कला स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) इन दिनों डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही का शिकार बना हुआ है। स्वास्थ्य सुविधा के लिए पहुंचे मरीज घंटों अस्पताल गेट पर बैठे डॉक्टर और स्टाफ का इंतजार करते नजर आते हैं, लेकिन अस्पताल में ताला या खाली कमरा ही दिखाई देता है।
ग्रामीणों ने बताया कि पीएचसी में कुल 10 कर्मचारी पदस्थ हैं — डॉ. राजनंदनी दहरिया, अजय वस्त्रकार, केडी सिंह, दीपमाला कुर्रे (स्टाफ नर्स), ममता कंवर, सीमा चंद्रभास, पद्मभूषण पैकरा, ललित कुमार कुर्रे और सुचिता सहित अन्य। मगर इनमें से अधिकांश या तो मस्तूरी मुख्यालय में ड्यूटी देते हैं या कई-कई दिनों तक पीएचसी में दिखाई ही नहीं देते।
ग्रामीणों के अनुसार, “अक्सर यहां सिर्फ एक या दो कर्मचारी ही मौजूद रहते हैं। डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण लोगों को मजबूरी में महंगे प्राइवेट डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है।”
राज्य सरकार की मंशा थी कि हर 5–10 किलोमीटर की दूरी पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाए, परंतु कुकुरदी कला पीएचसी की हालत उस मंशा पर सवाल खड़े करती है।
जब इस संबंध में डॉ. राजनंदनी दहरिया से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
वहीं डॉ. अजय वस्त्रकार (आरएमए) ने बताया कि “मेरा मुख्यालय मस्तूरी में है और मेरी ड्यूटी दो से आठ तक वहीं लगाई गई है।”
इस मामले पर जब बीएमओ मस्तूरी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार से बात की गई, तो उन्होंने कहा कि “सभी कर्मचारियों को आयुष्मान कार्ड बनाने में लगाया गया है, इसलिए वे पीएचसी में उपस्थित नहीं रह पा रहे हैं।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “आप लोग हमेशा पीछे ही पड़े रहते हो।”
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि डॉक्टर और स्टाफ की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, ताकि गांव के लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधा के लिए भटकना न पड़े।


0 Comments