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कुकुर्दीकला में नए रेत घाट का विरोध तेज, जनसुनवाई से पहले ग्रामीणों में बढ़ता विरोध



ग्राम पंचायत कुकुर्दीकला में प्रस्तावित नए रेत घाट को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। 29 अप्रैल को होने वाली जनसुनवाई से पहले ही क्षेत्र में विरोध बढ़ गया है। ग्रामीणों ने साफ कहा है — “अब और रेत घाट नहीं चाहिए।”


स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले से संचालित उदयबंद और अमलडीह रेत घाटों के कारण उनकी स्थिति पहले ही खराब हो चुकी है। ऐसे में नए घाट की योजना ने लोगों के विरोध को और मजबूत कर दिया है।

ग्रामीणों के मुताबिक, रेत से भरे भारी वाहन (ट्रक/डंपर) दिन-रात गांव की सड़कों पर दौड़ते हैं, जिससे सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं। हालात यह हैं कि आम लोगों का चलना तक मुश्किल हो गया है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। आरोप है कि घाट संचालकों द्वारा सड़कों के रखरखाव के लिए मुरुम डालकर समतलीकरण तक नहीं कराया जाता।


इसके अलावा, रेत परिवहन में लगे वाहनों में तिरपाल नहीं लगाए जाने से उड़ती धूल सीधे राहगीरों और घरों तक पहुंच रही है। इससे लोगों में आंख और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर इसका ज्यादा असर पड़ रहा है।


ग्रामीणों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि नदी में गहराई तक अवैध खनन किया जा रहा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है। उनका कहना है कि पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है, लेकिन प्रशासन इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है।


जनसुनवाई का ग्रामीणों द्वारा विरोध किए जाने की बात भी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब पहले से संचालित रेत घाटों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है, तो नए घाट की अनुमति देना पूरी तरह अनुचित है।


अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस बढ़ते विरोध और जनसुनवाई के विरोध पर क्या रुख अपनाता है।

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