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राशि स्टील द्वारा कंपनी के अंदर भारी भरकम तालाब बनाकर जहर नुमा कैमिकल को किया जा रहा जमा



कंपनी के भीतर ही किया गया 5 बोर का निर्माण जिसके द्वारा ही कंपनी और वाशरी का संचालन जल संकट आना हो गया शुरू 




बिलासपुर (मस्तूरी): मस्तूरी क्षेत्र के पाराघाट स्थित राशि स्टील पावर लिमिटेड एक बार फिर विवादों के घेरे में है। स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों ने गंभीर आरोप लगाया है कि प्लांट से निकलने वाले दूषित और जहरीले पानी को अब नदी में छोडा जा रहा था उसे कम कर प्लांट के भीतर ही 'गहरीकरण' कर भारी "तालाब नुमा (गहरे गड्ढों में संचयन) किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया सीधे तौर पर भूजल (Groundwater) को प्रदूषित कर रही है।

*क्या है पूरा मामला?*

पहले इस प्लांट का अपशिष्ट जल सीधे लीलागर नदी में बहाए जाने की शिकायतें आती थीं। अब प्रबंधन ने इसे प्लांट के भीतर ही "तालाब" बनाकर रोकना शुरू कर दिया है। तकनीकी रूप से किसी भी स्टील प्लांट को 'जीरो लिक्विड डिस्चार्ज' (ZLD) का पालन करना अनिवार्य है। इसका अर्थ है कि पानी को ट्रीट (साफ) करके दोबारा उपयोग करना चाहिए। लेकिन, यदि इस जहरीले पानी को बिना वैज्ञानिक उपचार के केवल जमीन में गड्ढे खोदकर जमा किया जा रहा है, तो यह मिट्टी के रास्ते से रिसकर नीचे के जल स्तर को जहरीला बना सकता है।




ग्रामीणों की बढ़ती चिंताएं

पीने के पानी का संकट: आसपास के गांवों में हैंडपंप और कुओं का पानी प्रदूषित होने के सांथ -सांथ ग्राम पाराघाट और आसपास के गावों का जल स्तर निचे जा चूका है चुकी राशि स्टील के द्वारा अपने कंपनी के भीतर ही 5 बोर खुदवाए गए है जो 5 हार्स पॉवर के बताए जा रहे है जो नियमित 24 घंटे अंधाधुंध पानी कि निकासी कर रहे है जिससे राशि स्टील अपना कंपनी और कोल वाशरी को इसी बोर के पानी से संचालित कर रहा है,जिससे आने वाले दिनों मे क्षेत्र मे भारी संकट आने वाला है क्योंकि अभी तों फ़रवरी माह ही पार हो रहा है।


खेती पर असर: दूषित पानी के रिसाव से खेतों की मिट्टी अपनी उर्वरता भी खोती जा रही है।

पूर्व का रिकॉर्ड: बता दें कि पूर्व में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) ने ठोस अपशिष्ट (कचरा) प्रबंधन में लापरवाही के चलते उक्त प्लांट पर 1.25 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी ठोका था।


*नियमों की अनदेखी?*

पर्यावरण क्लीयरेंस (EC) के दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी को पानी के पुनर्चक्रण (Recycling) के लिए उपयुक्त प्लांट लगाना अनिवार्य है। यदि केवल 'गहरीकरण' के नाम पर दूषित जल का भंडारण किया जा रहा है, तो यह वॉटर एक्ट 1974 का खुला उल्लंघन है।




*कार्यवाही के नाम पर झुनझुना*

स्थानीय जागरूक का कहना है कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि इसकी शिकायत जिला प्रशासन, पर्यावरण मंडल और जल संसाधन बिलासपुर से कर चुके हैं पर कार्यवाही के नाम पर केवल झुनझुना ही हाँथ लगा हैं!


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